भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मिशन अब अपने अगले बड़े और रोमांचक चरण में पहुँच चुका है। केंद्र सरकार ने IndiaAI मिशन के तहत फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) बनाने के लिए आठ संगठनों का चयन किया है, जिनमें IIT बॉम्बे, टेक महिंद्रा और फ्रैक्टल एनालिटिक्स जैसे दिग्गज शामिल हैं। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान इनके नामों की घोषणा की।
इन सभी प्रोजेक्ट्स में सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट IIT बॉम्बे को सौंपा गया है, जो अपने ‘भारतजेन’ कंसोर्टियम के जरिए एक ऐसा AI मॉडल विकसित करेगा जिसमें एक ट्रिलियन (1,000,000,000,000) पैरामीटर्स होंगे। यह आकार उसे दुनिया भर में बन रहे सबसे बड़े AI मॉडल्स की लीग में ला खड़ा करता है! इस प्रयास को支持 देने के लिए IndiaAI मिशन ने 988.6 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी मंजूर की है।
AI की दुनिया में, पैरामीटर्स वे सीखे हुए आंतरिक variables होते हैं जो एक मॉडल को डेटा में patterns और relationships पहचानने की क्षमता देते हैं। जितने ज़्यादा पैरामीटर्स होंगे, मॉडल की भाषा को समझने की क्षमता उतनी ही परिष्कृत और सोफिस्टिकेटेड मानी जाती है। भारत के लिए, एक ट्रिलियन-पैरामीटर वाला मॉडल एक प्रमुख मील का पत्थर है जो देश में ‘मेड इन इंडिया’ AI capabilities को वैश्विक नेताओं से टक्कर लेने लायक बनाएगा।
चयनित आठ संगठनों की पूरी सूची में एवतार AI, आईआईटी बॉम्बे कंसोर्टियम – भारतजेन, फ्रैक्टल एनालिटिक्स लिमिटेड, टेक महिंद्रा लिमिटेड, ज़ेनिटेक एआईटेक इनोवेशन्स, जेनलूप इंटेलिजेंस प्राइवेट लिमिटेड, न्यूरोडीएक्स (इंटेलीहेल्थ) और शोध AI शामिल हैं। ये सभी संगठन विभिन्न applications पर केंद्रित फाउंडेशनल एलएलएम बनाने में अपनी-अपनी भूमिका निभाएंगे।
टेक महिंद्रा, जो पहले से ही ‘प्रोजेक्ट इंडस’ नामक अपने स्वदेशी इंडिक मॉडल पर काम कर रहा है, ने इस चयन का स्वागत किया। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह IndiaAI मिशन का हिस्सा बनने पर “गर्व महसूस कर रही है”। उन्होंने कहा, “यह घोषणा हमारे अपने और भारत के अपने इंडिक एलएलएम, प्रोजेक्ट इंडस के निर्माण के बाद आई है। पूरी तरह से इन-हाउस और कम लागत पर बनाया गया, प्रोजेक्ट इंडस को ओपन सोर्स बनाने से लेकर सॉवरेन एलएलएम बनाने तक का सफर एक सीख और फायदेमंद अनुभव रहा है।”
यह नवीनतम कदम मिशन के तहत चयन के पिछले दौर पर आधारित है। मई 2025 में, तीन स्टार्टअप्स — सोकेटAI, ज्ञानी.एआई, और गण AI — को भारत के पहले स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल बनाने के लिए चुना गया था। उससे एक महीने पहले, सर्वम AI सहित चार अन्य स्टार्टअप्स को विशेष AI सिस्टमों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए चुना गया था। यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन टीमों के पास आवश्यक संसाधन हों, सरकार ने क्लाउड और डेटा प्रदाताओं के साथ भी काम किया है ताकि GPU तक पहुंच का विस्तार किया जा सके, जो बड़े AI मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिए आवश्यक हैं।

मंत्री वैष्णव ने कहा कि पहले बैच के मॉडल्स की प्रगति उम्मीदों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “पहले जिन मॉडलों का चयन किया गया था, वे बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रहे हैं और मुझे विश्वास है कि फरवरी 2026 में AI इम्पैक्ट समिट के शुरू होते तक, भारत के पास एक या अधिक मॉडल तैयार होंगे।”
आगे देखते हुए, सरकार आने वाले दिनों में एक AI फ्रेमवर्क भी पेश करने की योजना बना रही है। इस फ्रेमवर्क को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि यह स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करेगा कि AI सिस्टम को देश में कैसे जिम्मेदारी से बनाया और तैनात किया जाना चाहिए। यह कदम भारत को AI के क्षेत्र में एक जिम्मेदार और नेतृत्वकर्ता देश के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. 1-ट्रिलियन पैरामीटर वाले AI मॉडल का क्या मतलब है और यह इतना खास क्यों है?
AI में पैरामीटर वे internal variables होते हैं जो एक मॉडल को सीखने और निर्णय लेने की क्षमता देते हैं। जितने ज़्यादा पैरामीटर होंगे, मॉडल उतना ही जटिल और बारीक patterns को समझ सकता है। 1-ट्रिलियन पैरामीटर का मतलब है कि यह मॉडल OpenAI के GPT-4 जैसे दुनिया के सबसे उन्नत मॉडल्स के बराबर की श्रेणी में आएगा। यह भारत को AI टेक्नोलॉजी में ‘आत्मनिर्भर’ (self-reliant) बनाने और वैश्विक स्तर पर compete करने की क्षमता देगा।
2. इस प्रोजेक्ट से आम जनता को क्या फायदा होगा?
इसके फायदे बहुत व्यापक होंगे! यह मॉडल भारतीय भाषाओं, संदर्भों और जरूरतों को बेहतर ढंग से समझेगा। इससे हेल्थकेयर, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, गवर्नेंस और भाषा अनुवाद जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक AI टूल्स बनाने का रास्ता खुलेगा। उदाहरण के लिए, एक किसान स्थानीय भाषा में AI से सलाह ले सकता है या एक छात्र किसी भी regional language में पढ़ाई के लिए AI ट्यूटर का इस्तेमाल कर सकता है।
3. क्या यह मॉडल ChatGPT जैसे ग्लोबल मॉडल्स का मुकाबला कर पाएगा?
लक्ष्य बिल्कुल यही है! इस मॉडल को बनाने का प्राथमिक उद्देश्य ही भारत को वैश्विक AI दौड़ में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है। इसे भारतीय डेटा और संदर्भों पर ट्रेन किया जाएगा, जिससे यह भारत-विशिष्ट समस्याओं और भाषाओं के लिए GPT जैसे मॉडल्स से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। हालाँकि, इसमें समय लगेगा, लेकिन यह भारत के लिए AI में ‘सॉवरेन्टी’ (संप्रभुता) हासिल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।





















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